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सावन

सावन आया सावन आया ये कैसा सावन आया है.. ना खुशियां हैं ना झूले हैं ना ये बारिश लाया है फिर ये कैसा सावन आया है.. अरे सावन तो तब आता था जब हरियाली लहलहाती थी.. सावन तो तब आता था जब चिड़ियाएं चहचहाती थी.. ना वो मीठी बोली है ना कहीं हरियाली है.. चिड़िया तो मानो खत्म हो गई सूख गई हर पेड़ की डाली है.. अब तो मोटर गाड़ी की टें टें पों पों और प्रदूषण छाया है.. ये कैसा सावन आया है ये कैसा सावन आया है.. मोर नाचते थे बागों में.. रिश्ते बंधते थे कच्चे धागों से.. (रक्षाबंधन) एक कटोरी दूध के बदले वरदान मांगते थे नागों से.. (नाग पंचमी) बाग बगीचे विलुप्त हो गए, मोरों को मारा जाता है.. रिश्ते बंधते चाइनीज़ धागों से और नागों का जहर उतारा जाता है.. लोभ लालच और स्वार्थ का अब तो चारों ओर फैला साया है.. ये कैसा सावन आया है ये कैसा सावन आया है.. आजादी के कहानी किस्से गली गली मशहूर थे.. ले तिरंगा हाथ में हर कोई देशप्रेम में चूर थे.. अब हर घर वीभीषण बैठा लंका खुद की जलवाने को.. गद्दार देश के छुपे देश में फिर से देश को गुलाम कराने को.. ना लोटेगा वो सावन फिर से कह मनीष ने खुद को समझाया है.....

जिंदगी

चलने दो जिंदगी की गाड़ी को वक़्त के पहियों पे... कब वक़्त रुक जाए और ये जिंदगी थम जाए कोई कह नहीं सकता....