Posts

Showing posts from 2020

तेरी खुशबु

 शहर से हवा आई है तेरी खुशबु लेकर..  मगर कमबख्त अब हम मुस्कुराना भूल चुके हैं। 

बदनाम

 बदनाम तो बहुत हैं हम तेरे शहर की गलियों में.. मगर हमें अंधेरों में चमकना आता है। 

सूकून

 नफरतों का शौक नहीं ना मोहब्बत का जूनून था । कोई लगा था अपना सा और दिल को ये सूकून था ।

साजिश

 साजिशों ने खता की दुश्मनों ने फायदा उठाया है । लाख कोशिशों के बावजूद कोई हमारा कुछ ना उखाड़ पाया है ।

बारिश

 रो पड़ा आसमां भी तड़पकर, जब धरती से मिलन की बात आई । और लोगों ने समझा बारिश आ गई ।

Believe in yourself

Believe in yourself and you are the king. 

खुदगर्जी

सम्भलकर चला करो जनाब दुनिया में खुदगर्जी बढ़ गई है। 

हैसियत

भूल चुके थे खुद को खुद से ही.. हैसियत का अहसास हुआ दुश्मनों का बढ़ता काफिला देखकर..

Condition

If you can't stay then don't come.. If you can come then don't leave..

Haters

Haters are the real appreciators.. Love and respect them. 

चिट्ठी

रात फिर रोना आया तेरी चिट्ठियां पढकर... काश वो मोहब्बत महज लफ्जों तक सीमित ना होती ।

सुखा पेड़

लाख कोशिश की जमाने मुझे गिराने की मगर मैं वो सुखा पेड़ था जो तुफानों में खड़ा रहा ।।

मैं बहुत बदतमीज हूँ

 कोई मुझे भी सीखा दे सलीका ए जिंदगी कि मैं बहुत बदतमीज हूँ। बिना नाप के ही सिल दिया हो किसी दर्जी ने कि मैं वो अधूरी सी कमीज हूँ। जो जैसा है उस से वैसे ही पेश आता हूँ। जी हाँ जनाब मैं भी दो वक्त खाना खाता हूँ। जिसे खाकर आ जाए आनंद कि मैं वो व्यंजन लजीज हूँ। कोई मुझे भी सीखा दे सलीका ए जिंदगी कि मैं बहुत बदतमीज हूँ। किसी का फालतू का प्रवचन जैसे मुझे सुनना आता ही नहीं। कोई खुद से ज्यादा समझदार आजकल किसी को पाता ही नही। जिसे खुद के गुरुर से है प्यार कि मैं ही वो इश्क का मरीज हूँ। कोई मुझे भी सीखा दे सलीका ए जिंदगी कि मैं बहुत बदतमीज हूँ । ना मंदिर में जाता हूँ, ना मस्जिद में सिर झुकाता हूँ। हालात से लड़ते लोगों से अक्सर सीखता जाता हूँ। सीखा जिसने जिंदगी की ठोकरों से मैं ही वो नाचीज़ हूँ। कोई मुझे भी सीखा दे सलीका ए जिंदगी कि मैं बहुत बदतमीज हूँ । कोई बदनाम करता है, कोई शाबाशी देता है। कोई जान छिड़कता है, कोई जान ही ले लेता है। कहते हैं जिसे प्यार से 'मनीष' सभी हां मैं ही वो हरदिल अजीज हूँ। कोई मुझे भी सीखा दे सलीका ए जिंदगी कि मैं बहुत बदतमीज हू...

झूठा प्यार

किया जो तुझसे वो प्यार झूठा था.. तुझसे किया हर इकरार झूठा था.. मुझे तो आदत थी जख्म खाने की 'मनीष' तुने मुझपे किया वो एतबार झूठा था.. 

शायर

तेरी जिस मजबूरी ने तुझे कायर बना दिया.. तेरी उसी मजबूरी ने 'मनीष' को शायर बना दिया.. 

हैसियत

लोगों के रंग पहचानने लगोगे तो उम्र गुजर जाएगी... खुद की शख्सियत को इतना ऊंचा करो कि लोग खुद की औकात का अंदाजा लगाए तुम्हारी हैसियत देखकर.....

खामोशियों के धागे

ख़ामोशियों के धागे ना उलझाया करो... सुलझाते सुलझाते उम्मीद और जिंदगी दोनों खत्म हो जाती हैं।। 

इश्क

कहीं कोई आहट भी ना होगी और यूं ही गुजर जाएगा ये इश्क है जनाब शांत समंदर सा  टूटकर बिखर जाएगा

नेत्रदान महादान

दो मोती ये प्यारे प्यारे सारा जहाँ दिखलाते हैं.. सारे जहाँ में हर कोई कहां ये मोती पाते हैं.. जिसको मिले वो इतराता है.. ना मिलने वाले का मजाक उड़ाता है.. इन आंखों के दम पर ही हम पहचानते अपनों को.. इन आंखों के दम पर ही हम उड़ान देते हैं सपनो को.. रंगों की पहचान कराती हैं ये.. सावन का अहसास कराती हैं ये.. कितनी प्यारी है दुनिया ये हमको दिखलाती हैं.. पेड़ पौधे और पशु पक्षियों में फर्क सिखलाती हैं.. कीमत इनकी वही जानता जो आंखों से अंधा है.. कैसे भला पहचाने वो क्या अच्छा क्या गंदा है.. चलो एक अलख नई जगाते हैं.. अंधों को दुनिया दिखलाते हैं.. नेत्रदान फर्ज हम सबका, ये हमको निभाना है.. जो वंचित हैं खुबसूरती से जहान की उनको ये अहसास कराना है.. 

हम बुरे ही सही ग़र तुमने मान लिया है

हम बुरे ही सही गर तुमने मान लिया है.. हमने भी अब सिर्फ खुश रहने का ठान लिया है.. ना होगा अब इंतजार तेरे खतों का तेरे गुलाब का.. अब अलग ही मजा होगा अपने रुआब का.. अकेले थे अकेले रहेंगें ये हमने जान लिया है.. हम बुरे ही सही गर तुमने मान लिया है.. हमने भी अब सिर्फ खुश रहने का ठान लिया है.. अब हम भी मां की एक आवाज पे उठ जाया करेंगें.. मां का कहा हर काम भाग भाग के करेंगें.. जन्नत है मां के पास, हमने पहचान लिया है.. हम बुरे ही सही गर तुमने मान लिया है.. हमने भी अब सिर्फ खुश रहने का ठान लिया है.. अब टाईम होगा दोस्तों संग महफिल जमाने का.. तेरे साथ रहते, हुए जो गिले शिकवे उनको भुलाने का.. खड़े रहने को महफिल में सीना तान लिया है.. हम बुरे ही सही गर तुमने मान लिया है.. हमने भी अब सिर्फ खुश रहने का ठान लिया है.. अब DP और फैशन अपनी मर्जी का होगा.. तुम जैसों से रिश्ता खुदगर्जी का होगा.. आजाद पंछी का मनीष ने अरमान लिया है.. हम बुरे ही सही गर तुमने मान लिया है.. हमने भी अब सिर्फ खुश रहने का ठान लिया है..

मशहूर

इतने मशहूर हुए हम जमाने मे कि लोगों ने नाम तक पूछना छोड़ दिया..

खंजर

एक अरसे बाद दिखा यादों का समन्दर कोई.. आंखो में बसा है अब तक अनजान सा मंजर कोई.. वो कहते हैं भुलाना आसान है उन्हें कोशिश भी करुं तो सीने पे चुभता है खंजर कोई..

ये कहते हैं जनाब चरखे ने आज़ादी दिलाई थी

24 साल के जवान ने हंसकर फांसी गले लगाई थी.. और ये कहते हैं जनाब चरखे ने आजादी दिलवाई थी.. जलियांवाला कांड को देखा जिसने नन्ही आंखो से.. बचपन से नाता था जिसका जेल की सलाखों से.. मारने को अंग्रेजों को उसने खेत में बंदूक उगाई थी.. और ये कहते हैं जनाब चरखे ने आजादी दिलवाई थी.. कसमों वादों से दूर उसे आजादी से प्यार था.. देश की खातिर मिटने को वो हर लम्हा तैयार था.. देश आजाद कराने की उसने कसमें खाई थी.. और ये कहते हैं जनाब चरखे ने आजादी दिलवाई थी.. ना तो वो कायर था और ना कोई गद्दार था.. भारत मां का पूत लाडला वो भगत सिंह सरदार था.. असेंबली हाल में बम फेंककर एक नई अलख जगाई थी.. और ये कहते हैं जनाब चरखे ने आजादी दिलवाई थी.. लिया बदला मौत का लाला की अंग्रेज अफसर को मारा था.. देश के दुश्मन अंग्रेजों को मौत के घाट उतारा था.. मनीष भी है FAN उसी का जिसने अंग्रेजों की नींद उड़ाई थी.. और ये कहते हैं जनाब चरखे ने आजादी दिलवाई थी.

मुक्कमल

मिले मंजिल हर प्यार को, जरूरी तो नहीं.. कुछ कहानियाँ अधूरी भी मुकम्मल होती हैं।