नेत्रदान महादान

दो मोती ये प्यारे प्यारे सारा जहाँ दिखलाते हैं..
सारे जहाँ में हर कोई कहां ये मोती पाते हैं..
जिसको मिले वो इतराता है..
ना मिलने वाले का मजाक उड़ाता है..
इन आंखों के दम पर ही हम पहचानते अपनों को..
इन आंखों के दम पर ही हम उड़ान देते हैं सपनो को..
रंगों की पहचान कराती हैं ये..
सावन का अहसास कराती हैं ये..
कितनी प्यारी है दुनिया ये हमको दिखलाती हैं..
पेड़ पौधे और पशु पक्षियों में फर्क सिखलाती हैं..
कीमत इनकी वही जानता जो आंखों से अंधा है..
कैसे भला पहचाने वो क्या अच्छा क्या गंदा है..
चलो एक अलख नई जगाते हैं..
अंधों को दुनिया दिखलाते हैं..
नेत्रदान फर्ज हम सबका, ये हमको निभाना है..
जो वंचित हैं खुबसूरती से जहान की उनको ये अहसास कराना है.. 

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