Posts

Showing posts from January, 2019

रुबरु : एक स्वप्न

‌"तुम.. नहीं नहीं तुम.. हां तुम" खड़ी भीड़ में उसने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा, "पहचाना मुझे?" मैं आश्चर्यचकित सा उसकी तरफ देखता रहा। उसने ही असमंजस दूर करते हुए चुप्पी तोड़ी, "जनाब मैं वही सुकून हूँ जो तुमको तब मिला था इश्क के रास्ते पर। मैनें रोका था तुमको उस रास्ते जाने से। मगर आप जनाब दूसरी ही धुन में थे। एक ना सुनी मेरी और चलते गये।" मैं अभी भी उसको बस देखे जा रहा था चुपचाप। उसने कहना जारी रखा, "समझाया था मैनें तुमको गर इस रास्ते गए तो मुझे खो दोगे। और देखो आज तुम मुझे ढूंढ रहे हो उस भीड़ में।" तभी मुझे भी अहसास हुआ कि हां इसीलिए तो खड़ा था मैं यहाँ इस भीड़ में सुकून की तलाश में। सच ही तो कह रहा था वो। मैं ही इश्क के रास्ते पर था सब कुछ जान बूझकर भी। जैसे ही मैंने नजर दोबारा उसकी तरफ घुमाई, वो नहीं था वहां। जा चुका था फिर से मुझसे बहुत दूर करवाकर रुबरु मुझे सच्चाई से। मैं वहां खड़ा था अब भी उसी भीड़ में मुझ जैसे लोगों के बीच। तभी मैं खड़ा खड़ा हिलने लगा जोर जोर से। तभी मेरी आंखें खुली तो देखा, मां जगा रही थी मुझे, "बेटा अब उठ भी ले, औ...

Love hurts

Getting in love again and again.. Only gives you tears and pain.. When you first fall in love.. You behave like a dove.. You wanna fly high.. You wanna touch the sky.. You seem only to be with one.. You then see only that person.. It happens for some days.. A lot of promises are made.. You see love everywhere.. For anything you don't care.. But after a time you get bored of it.. You will find it only a shit.. You will feel the pain of breakup.. Nothing will be there for backup.. Then you will be in tears.. You will loss all your cheers.. Then you will remind my lines.. That's all about IM's(INVINCIBLE MANISH) vines.. Getting in love again and again.. Only gives you tears and pain.. 

Truth

Truth hurts once.. Fake sympathy hurts again and again.. 

अंजाम ए इश्क : गजल

कैसे बदनाम कर दूं मोहब्बत को, इल्जाम मुझ पर भी आएगा.. कैसे बेवफा कह दूं उसे, प्यार बदनाम हो जाएगा.. जरूर कोई मजबूरी होगी उसकी बेवफाई की.. गर उसे मैं ना समझूं तो, वादा बेनाम हो जाएगा.. कोशिश की होगी उसने भी जुदा ना होने की, मगर जुदाई ना हो तो, किस्सा ना सरेआम हो पाएगा.. बेमानी होगी उसकी कसमों के साथ, गर कसमें निभा दे तो, खिलाफ परिवार हो जाएगा.. मनीष को छोड़कर दुख तो उसे भी हुआ होगा, मगर कैसे हो सकता है ये कि, सदियों बाद कोई प्यार मुकम्मल हो जाएगा..

जिंदगी मौत की कहानी

एक किस्सा पुराना दोहराता हूँ.. जिंदगी और मौत की नोक झोंक सुनाता हूँ.. दो बहनों की ये कहानी है.. है थोड़ी अलग मगर जानी पहचानी है.. था एक हस्पताल श्मशान के पास.. एक शांत रात थी बहुत उदास.. एक बहन 'जिंदगी' का हस्पताल में ठिकाना था.. तो दूसरी 'मौत' का घर श्मशान विराना था.. उस रात दोनों का बहन प्रेम जाग उठा.. मिलने को एक दूसरी से बावरा मन भाग उठा.. निकल पड़ी दोनों अपने ठिकानो से.. हो बेखबर दुनियादारी के कानों से.. हस्पताल में एक मरीज वेंटिलेटर पर कराह रहा था.. जिंदगी से पीछा छुड़ाने के लिए मौत को बुला रहा था.. दोनों बहनों के मिलने का ये सही ठिकाना था.. दोनों को कुछ समय साथ जो बिताना था.. पहुंची मौत वहां मरीज की करुण पुकार सुनकर.. जिंदगी भी आई वहां थोड़ा सा तनकर.. आते ही दोनों ने मिलने की खुशी जताई.. पर चाहकर भी एक दूसरे को ना गले लगा पाई.. दोनों की आंखों में था एक ही ख्याल.. आंखों आंखों में पूछा एक दूजे का हाल.. तभी जिंदगी ने कहा इतराकर.. थोड़ी आंखे फैलाकर और थोड़ा मुस्कुराकर.. मेरे तो मजे हैं शान से रहती हूँ.. सब मुझे चाहते हैं सबके दिलों में रहती ...

सुकून की नींद

मौत के आगोश में मिली वो सुकुन की नींद  'मनीष'  भटकता रहा सारी दुनिया में ताउम्र जिसके लिए..

बदनाम मोहब्बत

गर खामोशियों के लफ्ज़ पढ लेता हर कोई तो आज मोहब्बत यूं बदनाम ना होती। 

शौक

लिखने का शौक नहीं मुझे.. ये तो जज्बात हैं मेरे दिल के जो कलम को रास्ता बनाए बैठे हैं