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Showing posts from 2018

Thoughts

'Thoughts' are responsible for 'Good' and 'Bad'.... 'Faces' are just only blamed.... 

मौत से खेल

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अल्फाज़ों का फर्क

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THE REAL ME

दिन निकल जाता है झुठी हंसी हंस हंस के, कम्बख्त रात मुझे मुझसे वाकिफ करवाती है.. दिन में मैं लोगों से मजाक करता हूं, रात की चांदनी मुझ रोते का मजाक उड़ाती है.. 

मोहब्बत

जिसे मोहब्बत की तलब है वो जिंदगी से मिल आए एक बार.. वहीं खड़ी है उसी मोड़ पर जहां से मोहब्बत की शुरुआत होती है.. 

बदलाव

स्याही कलम की खत्म होती है अल्फाज़ों की नहीं.. फितरत इंसान की बदलती है जज्बातों की नहीं.. 

जीने की वजह

बहुत हो गए इम्तिहान ए जिंदगी.. अब तो जीने का जरिया लौटा दे.  

Smile

गमग में मुस्कुराता हुआ ही ठीक हूँ मैं ए जमाने.. तु खुद को रोक बदलने से.. 

बेटियाँ

वक़्त बदलता है बेटियाँ सयानी हो जाती है... लेकिन एक बाप के लिए वो गुडिया रानी ही कहलाती है... 👍😊

मजाक : मिजाज

मजाक भी जरूरी है अस्त व्यस्त जिंदगी में जनाब.. लेकिन किसी के मजाक से उसके मिजाज का अंदाजा लगाना ठीक नहीं..... 

दिवाली : तब और अब

आ गई फिर से दिवाली अब दीप जलेंगें.. सबके चेहरे एक बार फिर से खुशियों से खिलेंगे.. लेकिन आज मैं आपको एक राज बतलाता हूं.. पहले की और अब की दिवाली में अंतर बताता हूं.. पहले की दिवाली कुछ यूं मनाई जाती थी.. अपने घर के साथ सारी गली सजाई जाती थी.. चारों ओर मिट्टी के दीप जगमगाते थे.. सारे मिलकर एक साथ दिवाली मनाते थे.. पटाखे फुलझड़ियां मिलकर जलाते थे.. अनार चक्करी सारी रात जगमगाते थे.. अब आज की दिवाली की बात बताता हूँ.. जो बदलाव आया वो समझाता हूँ.. अब बस एक अपना घर सजाते हैं.. चाइनीज सामान से अपना घर जगमगाते हैं.. मिट्टी के दियों से जो दूसरों के घरों में रोशनी उतारते हैं.. वो खुद की रात अंधेरे में गुजारते हैं.. सड़क पर चलती लड़की में फुलझड़ी नजर आती है.. पड़ोस वाली भाभी आजकल बम पटाखा कहलाती है.. सुधर जा ए जमाने वरना खुद से नजरें ना मिला पाएगा.. मनीष इस से आगे अब कलम ना हिला पाएगा..

INCREDIBLE LOVE

प्यार इतना है तुझसे गर जुदा होना भी चाहूं तो सांसे इजाजत नहीं देती... 💕💕💕

तेरा साथ

थम जाए ये वक्त यहीं गर तुम पास हो मेरे.. सारी खुशियां देकर अपनी खरीद लूं सारे गम तेरे.. 

हंसी

खो गई वो हंसी पता नहीं कहाँ जो तेरे साथ मुस्कुराया करती.. 

मशहूर

गर मशहूर होना चाहते तो आज आसमानों को छू रहे होते.. मगर हालात से समझौता और शर्तों पे जीना कभी सीखा ही नहीं..

अदा

तेरी अदा बहुत मशहूर है जमाने में.. दूसरों को बदल कर खुद बदल जाने की..

खुशहाल परिवार

बहन की शरारतें भाईयों का प्यार बापू की डांट और मां का दुलार इन सबसे बनता है सुखी परिवार.. मां पूछती है 'खाना खाया या नहीं' बापू पूछता है 'रिजल्ट आया या नहीं' बहन बोलती है 'ओऐ हीरो कोई भाभी पटायी या नहीं' भाई पूछता है 'छोटे सही चल रही है पढाई या नहीं' किसी एक को भी कुछ हो जाए तो सबसे ज्यादा चिंता मां को होती है इस चिंता में मां आधी बार भुखी सोती है बाप भी कड़ी मेहनत करके सारा दिन कमाता है बच्चों के सपने अधूरे ना रह जाएं इसलिए जान पर भी खेल जाता है बहन की चुलबुलाहट सारे घर को खुशियों से भर देती है सबके थके चेहरों को खुश कर देती है बड़ा भाई भी सबका बहुत ख्याल रखता है मां बाप के सपने पूरे करने को मन लगाकर मेहनत करता है 'मनीष' का भी यही सपना है धरती पर सब परिवारों का यही हाल हो आपस में हो प्यार और सब खुशहाल हो..

मजबूरी

पता नहीं तेरी कौन सी मजबूरी है जिसने हमें अकेला कर रखा है.. 💔

तेरी खुशबु

हवाओं में तेरी खुशबु को महसूस किया है..💖💖 लगता है तेरी गलियों से गुजर कर आई है.. 💖💖

हंसी खुशी और वो

हंसी खुशी और वो : जैसे रास्ता ही भुल गए हैं हमारी ओर आने का... 💔💔

रात

आ गई फिर से बोझिल शाम अब रात होगी.. महबूब का तो पता नहीं पर चांद सितारों से जरूर बात होगी 💔

नींद

कम्बख्त नींद भी तुझ सी हो गई है.. मेरे पास आती ही नहीं

खिलौना

क्या फर्क पड़ता है जमाने को मेरे दर्द ए दिल से.. बयां भी करुं तो लोग खिलौना बना देते हैं

जख्म

अपने जख्मों की नुमाइश ना कर ए नादान.. लोग नमक लिए बैठे हैं इसी इंतजार में

आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं

चलो एक बार फिर से दिलों का व्यापार करते हैं.. आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं.. तुम देखकर मुस्कुरा देना मैं फिदा हो जाऊंगा.. सब कुछ भुल कर तेरे ख्यालो में खो जाऊंगा.. चलो फिर से नैनों को दो चार करते हैं.. आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं.. फिर शुरू होगा बातों का सिलसिला जो प्यार बढ़ाएगा.. दिल फिर से मिलने के नये नये बहाने बनाएगा.. चलो मिलकर फिर से दिलों में नई उमंग भरते हैं.. आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं.. सारी रात जागकर बातें करते हुए बताएंगे.. जुगनूओं के साथ हम दोनों भी गुनगुनाएंगे.. फिर से एक दूजे से कसमें वादे करते हैं.. आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं.. तुम रुठ जाना मैं फिर से तुम्हे मनाऊंगा.. मनाकर तुम्हें फिर से सिनेमा दिखाऊंगा.. चलो फिर से एक साथ चांद का दीदार करते हैं.. आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं.. तुम जिंदगी भर की कसमें खाकर फिर से छोड़ जाना.. एक बार फिर मेरे लाख मनाने पर भी ना वापस आना.. 'मनीष' को फिर से बर्बाद करते हैं.. आओ एक बार फिर मिलकर प्यार करते हैं.. चलो एक बार फिर से दिलों का व्यापार करते हैं.. आओ एक बार फिर मिलक...

आजादी

आजाद हुए एक साल और हो गया.. मेरा वो भारत पता नहीं कहाँ खो गया.. तब और अब में बहुत फर्क आ गया.. समय का चक्कर बहुत कुछ खा गया.. जिस आजादी के लिए भगत सिंह फांसी चढ़ गया.. उस आजादी का ख्वाब कहीं पीछे ही लद गया.. उसने तो भाईयों के प्यार के लिए बलिदान दिया था.. उधम सिंह ने भी भाईयों के बदले के लिए डायर का कत्ल किया था.. उन सबने तो मां बहन की इज्जत की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाई थी.. भारत मां की आजादी के लिए अपनी जान गंवाई थी.. चंद्रशेखर आजाद भी जीते जी ना अंग्रेज़ों के हाथ आया था.. सुभाष चंद्र बोस ने भी सब भाईयों को साथ मिलाया था.. और पता नहीं कितने ही गुमनाम इस भारत मां के लिए शहीद हो गए.. कितने ही लाल ऐसे ही देश की रक्षा के लिए मौत के आगोश में सो गए.. उन सबका सपना ऐसे भारत का था जिसमें सब एक हों.. मां बहन की सब इज्जत करें सबके विचार नेक हों.. आपस में सब भाईयों का प्यार हो.. सबसे सबका नेक व्यवहार हो.. लेकिन वो भारत कहीं पीछे ही खो गया.. आपस में भाईयों का बैर हो गया.. मां बहन बेटी की इज्जत को आज हर कदम पर खतरा है.. अपना ऐसा भारत देखकर रो रहा शहीदों का कतरा कतरा है.. ...

Birthday Wish

तेरे BIRTHDAY पे दूं तुझको तोहफा मैं क्या.. मांगता हूं हमेशा तेरे खुश रहने की दुआ.. आज के दिन जब तुम इस दुनिया में आए थे.. मां बाप की आंखों में खुशियां लाए थे.. बड़े लाड प्यार से तुमको पाला था.. लड़खड़ाने पर कदम तुमको संभाला था.. आगे भी कोई तुमपे परेशानी ना आए.. दुआ है तु सारी जिंदगी मुस्कुराए.. गर कोई गम तेरे पास आना चाहे.. तुझसे पहले वो मुझसे टकराए.. खुशियों की हमेशा तुझपे बरसात हो.. पैसों से हमेशा भरे तेरे हाथ हों.. तु जो चाहे तुझको मिल जाए.. तेरी जिंदगी जन्नत सी खिल जाए.. खुदा की रहमत हमेशा तुझपे बरसती रहे.. तु सारी जिंदगी ऐसे ही हंसती रहे.. जब भी तन्हाई में हमको बुलाओगे.. "मनीष" को हमेशा अपने पास खड़ा पाओगे.. Wish you a happy and delightful birthday.. May all your wishes come true... You keep smiling through all your life... May you get more heights in your life.. 

तेरी याद

आंखों में नमी दिल में उदासी छाई है.. आज फिर किसी की याद आई है.. आंखें ही आज बहुत कुछ कहना चाहती है.. उसकी आंखों के सामने रहना चाहती हैं.. आज "मनीष" फिर उन बाहों में रहना चाहता है.. अपने दिल की सब बातें उसको कहना चाहता है.. आज फिर उसके हाथों से परांठे खाने का मन कर रहा है.. दिल अपने पास बुलाने की जिद पर अड़ रहा है.. वो गुलाब का फूल फिर उसके हाथों में जाना चाहता है.. खुद को उसके सबसे पास पाना चाहता है.. याद आ रहा है तेरा वो साथ होने पर मुस्कुराना.. वो बिछड़ने के नाम से ही आंखों में पानी आ जाना.. वो RING फिर से उस उंगली को तरस रही है.. गुलाब की पंखुड़ियाँ तुझपे बरस रही है.. एक बार फिर से उन यादों को ताजा करने आ उसी ठिकाने पर.. चला दे आंखों से गोली मुझे रख के निशाने पर..

मां बाप और बेटी

बड़े लाड प्यार से पाला था उसे गोदी में खिलाया था.. मां ने अपनी बेटी को आगे बढ़ना सिखाया था.. कभी कंधे तो कभी पीठ पर झुलाया था.. बापू ने अपनी बेटी को मजबूत बनाया था.. उंगली पकड़कर चलना सिखाया.. बड़ी उम्मीद से उसको पढाया.. ज्यों ज्यों बेटी बड़ी होती जा रही थी.. मां बाप को उसके भविष्य की चिंता खा रही थी.. बेटी अब सयानी हो गई थी.. एक लड़के के सपनों की रानी हो गई थी.. दोनों एक दूसरे के प्यार में चूर हो गए थे.. सारे कालेज में लव बर्ड्स के नाम से मशहूर हो गए थे.. मां बाप तक भी ये खबर पहुंची तो दोनों हैरान रह गए.. बेटी की खुशी के लिए लड़के से मिलने की कह गए.. जब तहकीकात की लड़के कि तो पता चला वो लफंगा आवारा था.. लड़कियों की इज्जत से खेलने का उसका शौक न्यारा था.. बाप ने अब बेटी को बहुत समझाया.. लेकिन बेटी तो उसके प्यार में पागल थी उसे कुछ समझ ना आया.. एक रात वो उस लड़के के साथ घर से भाग गई.. मां बाप के माथे पर दे बदनामी का दाग गई.. 20 साल का प्यार 4 महीने के प्यार से हार गया.. उस मजबूर मां बाप को जीते जी मार गया.. अब मां बाप का मन समाज में होने वाली बदनामी को भांप गया.. ...

कुदरत के जज्बात

आज रात इतनी परेशान क्यों है.. रोशनी भी इतनी हैरान क्यों है.. सितारों में भी एक नमी सी है.. चांद में भी एक कमी सी है.. हवा ने भी खुद को शांत कर लिया है.. पंछियों ने भी आज मौन धर लिया है.. पानी में भी आज ठहराव सा है.. फूलों के दिलों में घाव सा है.. जुगनू आज जगमगा नहीं रहे.. कदम किसी के डगमगा नहीं रहे.. आज इस कुदरत को क्या हो गया है.. लगता है जैसे इसका भी कुछ खो गया है.. सब कुछ वीरान सा लग रहा है.. इंसान को छोड़कर हर कोई जग रहा है.. तालाब का पानी भी हिलोरें नहीं खा रहा.. शायद आज कुदरत से भी किसी का दुख देखा नहीं जा रहा.. एक पेड़ के नीचे तन्हा बैठा मैं ये सब देख रहा था.. रह रहकर तालाब में पत्थर फेंक रहा था.. पुछ बैठा मैं उस पेड़ से कि ये सब ऐसा क्यूँ कर रहे हैं.. क्या इनका भी कुछ खो गया है जो यूं मर रहे हैं.. पेड़ ना चाहते हुए भी रुंध गले से बोला.. क्यूँ हो गए हैं आज सब ऐसे इसका कारण खोला.. कि इंसान भले ही हमें भूल जाए पर भुलते नहीं हम.. अपने स्वार्थ की वजह से करता है हमारी कद्र कम.. अब ना कोई सितारों को गिनता है ना चांद को निहारता है.. आपसी दुश्मनी में भाई भाई को...

मां बेटी : एक व्यथा

जब पैदा हुई वो सब ने दुत्कारा था.. वो मां की ममता ही थी जिसने उसको पुचकारा था.. ना बाप ने ना दादी ने देखने तक की जहमत उठाई.. बेटी पैदा होने की सुनते ही उनकी उम्मीद डगमगाई.. देख रहे थे वो बेटे का सपना.. जिसे कहते छाती से लगाकर वो अपना.. बेटी पैदा हुई तो उनके चेहरे उतर गए.. उनके सारे अरमान अंदर ही मर गए.. अब पैदा हो गई तो पालना तो था ही.. उसे आज के माहौल में ढालना तो था ही.. मां ने सबके तानों को सहते उसे पाला था.. अपनी परेशानी भुलाकर उसको संभाला था.. नहलाती खिलाती उसके लाड लडाती.. उसकी भी तमन्ना थी कि अपनी बेटी को पढाती.. भेजने लगी उसे स्कूल सबके उपर से होकर.. उसको हंसाती खुद सारी रात रोकर.. उनकी हंसी भी जमाने को पसंद ना आई.. इंसानी भेड़ियों ने अपनी गंदी नजरें उस पे जमाई.. डरी डरी रहने लगी अब वो स्कूल आते जाते.. अचानक उठ जाती थी खाना खाते खाते.. जैसे तैसे उसने स्कूल पूरा कर लिया.. इसके बाद पैर काॅलेज में धर लिया.. सोचा था पढेगी लिखेगी आगे बढेगी.. अपनी मां के हर सपने को पूरा करेगी.. लेकिन हवस के दरिंदों ने उसे वहां भी नहीं छोड़ा.. उस फूल सी बेटी को एक एक ने निचोड...

मोबाईल

कितना अच्छा था सब, जब मोबाईल ना था.. किसी का ना कोई फैशन और कोई हेयरस्टाइल ना था.. अनजाने को तब यूं ही दोस्त बना लेते थे.. साथ बैठ कर सुख दुख की बतिया लेते थे.. खुशी की खबर घर जाकर सुनाकर आते थे.. एक साथ बैठकर खुशी के गीत गाते थे.. बड़े छोटे का लिहाज होता था.. आंखों में शर्म का ताज होता था.. बहन बेटी की हर कोई इज्जत करता था.. बाप की इज्जत खोने से हर युवा डरता था.. बड़े बड़े झगड़े भी आपस में पंचायत में सुलझाए जाते थे.. भूलकर सारे द्वेष एक दूसरे को गले लगाते थे.. शाम को चौपाल चबूतरों पे हुक्का गुड़गुड़ाता था.. एक बुजुर्गों का झुण्ड दिनभर की थकान भूलकर आपस में खिलखिलाता था.. देश सेवा का जज्बा हर युवा में होता था.. हर युवा सेना में भर्ती होने के सपने संजोता था.. छोटे बच्चों की तो एक अलग ही मस्ती होती थी.. संतरे की टाॅफी तब बहुत सस्ती होती थी.. इनकी टोली बहुत उधम मचाती थी.. अपने बच्चों को देख मां मंद मंद मुस्काती थी.. इनको अपनी मस्ती से मतलब था ना किसी की कोई परवाह थी.. सब चिंताओं से दूर इनकी एक अलग ही दुनिया थी.. जबसे मोबाईल आया सब कुछ बदल गया.. उस हंसती खेलती दुनि...

हर कोई मुझे बीच में क्यों छोड़ जाता है

हर कोई मुझे बीच में क्यों छोड़ जाता है सारे रिश्ते नाते एक पल में तोड़ जाता है.. कोई क्यों किसी को बीच में छोड़ जाता है.. मैं भी ऐसे ही कई बार छोड़ा गया हूँ.. अपनों द्वारा कई बार तोड़ा गया हूँ.. शुरूआत पिताजी ने की हमें छोड़ने की.. 20 जुलाई 2008 की वो मनहूस घड़ी थी हमें तोड़ने की.. बीच राह में छोड़ के खुद तो चल गए हमसे बहुत दूर..  खुद हंसते हुए गए हमें कर गए रोने पे मजबूर..  पिताजी के बाद अपनों ने भी छोड़ दिया साथ..  गिरते को बचाने के लिए नहीं दिया किसी ने हाथ..  खैर मां ने हमको गले से लगाया था..  पिताजी के बाद अपना हर सुख हम में ही पाया था..  जितना कर सकती थी उस से ज्यादा किया..  हमें जो चाहिए था तुरन्त ला कर दिया..  दुनिया बातें बनाती रहती थी..  बिन बाप के बेटों और विधवा मां को जली कटी सुनाती रहती थी..  सबकी सुन कर भी अनजान बनी रहती थी..  मेरी मां हमारे लिए ढाल बनी रहती थी..  दुनिया की सुन कर मैं पिसता रहता था..  रातों को एक झरना आंखों से रिसता रहता था..  रिश्तेदार भी छोड़...

उतार चढ़ाव

        *उतार चढ़ाव* तुझे शिखर पे चढ़ाकर मैं धरती पर उतर गया.. तुझे खुश करने को मैं सब कुछ कर गया.. तुझे जीना सिखा के खुद मरना सीख गया.. तुझे हंसा के खुद आंसुओं में भीग गया.. तुझे बड़ा करके खुद बच्चा बन गया.. अब तु रखेगा ख्याल मेरा सोच के अक्ल का कच्चा बन गया.. तुझे आगे बढ़ाकर खुद हो गया पीछे.. एक एक पल याद है जो गुजारा तेरी जुल्फों के नीचे.. तुझे समझदार बनाकर खुद पागल बन गया.. तेरी तरक्की से मेरा भी सीना तन गया.. तुझमें हिम्मत भरके खुद कायर बन गया.. तुझसे दूर होने के अहसास से ही डर गया.. तुझे सम्भलना सिखाकर खुद गिर गया.. उल्टे सीधे ख्यालों से मेरा दिमाग फिर गया.. हमेशा तेरा सोच कर अपना सब कुछ भूल गया..  तेरी खातिर हंसते हंसते तुझमें हो मशगूल गया..  लेकिन जब तुने छोड़ा सारे सपने टूट गए..  "मनीष" से अब सारे अपने रूठ गए..  अब "मनीष" इतना टूट गया कि जुड़ ना पाएगा..  वापस चार साल पहले मुड़ ना पाएगा.. 

आज आंखों में एक नमी सी है..

आज आंखों में एक नमी सी है.. किसी अपने की कमी सी है.. बार बार आ रहा है वो याद.. उस से मिलने की मैं कर रहा हूं फरियाद.. हर कोशिश कर ली हर दरवाजा खटखटा लिया.. खुद को पागल प्रेमी बना लिया.. आंख रो रो कर हो गई है लाल.. उस बेखबर को नहीं है मेरा कोई ख्याल.. 2 रात से नहीं सोया हूँ.. उसके लिए सारी रात रोया हूँ.. मन में आस है वापस आएगा.. मुझे अपना कहकर गले से लगाएगा.. प्यार में ऐसी सजा मिलेगी सोचा ना था.. खुद को प्यार करने से पहले एक पल भी रोका ना था.. उसको ही अपना माना पलकों पे बिठाया.. जिसने मुझे आज इस कद्र रुलाया.. ना खुद का कोई होश है ना ख्याल है.. उसकी याद में हो गया बुरा हाल है.. मैने तो प्यार किया था आखिरी सांस तक निभाऊंगा.. उसकी नफरत के साथ ना जिंदा रह पाऊंगा.. 

सुधार

कदम सुधार के कुछ सुधर गया है कुछ और सुधर जाएगा.. मनीष अब तेरे सपनों का राजकुमार बन के दिखाएगा.. वो सब करेगा जो तुने चाहा है.. लेकिन मनीष ने अपना सब कुछ तुझमें ही पाया है.. आगे पढेगा भी आगे बढेगा भी और एक नया मुकाम पाएगा.. गर रहा तेरा साथ हमेशा तो हर मुश्किल से टकरा जाएगा.. तेरे सपनों को भी नई उड़ान दिलवाएगा.. बनाकर डाक्टर तुझे एक नई पहचान दिलवाएगा.. तेरे दुख मेरे होंगे मेरे सुख तेरे.. इसी वचन के साथ लेगा सात फेरे.. तेरी हर बात ऊपर रहेगी.. मान लेगा वही जो जो तु कहेगी.. घर के हर काम में बराबर का हाथ बटाएगा.. पूरी जिंदगी तेरा साथ निभाएगा.. कभी गुस्सा नही करेगा ना तुझपे हाथ उठाएगा.. तुझे रोज अपने हाथों से खाना खिलाएगा.. ना पहुंचने देगा तेरे आत्म-सम्मान को ठेस कभी.. एक आखिरी मौका देकर देख अभी.. तु तो वो हीरा है जिसे ये नासमझ पहचान ना पाया.. बेवजह के घमंड में तुझको गंवाया.. जो ना करे तेरी इज्जत उस से मेरा भी कोई रिश्ता नहीं.. गर होता थोड़ा भी इल्म इस घड़ी का तो आज बेवजह यूं पिसता नहीं.. जब जब जिस रिश्ते की तुझे जरूरत होगी वही बन जाएगा.. बनकर तेरा भाई, बाप, बेटा उनकी ...

अभी के हालात

अभी के हालात ना कुछ चाह रह गया है ना कोई रंग रह गया है.. मनीष अब सिर्फ एक कटी पतंग रह गया है.. जिसका ना कोई पता ना ठिकाना है.. बस कहीं दूर जाके किसी पेड़ में अटक के तबाह हो जाना है.. दुनिया से एकदम अलग थलग हो गया है.. उसका नसीब कहीं जाके सो गया है.. ना किसी से कुछ बात करता है ना बोलता है.. कभी-कभी बस " I MISS YOU " कहने को मुह खोलता है.. पड़ा रहता है सबसे अलग एक कोने में.. लगा रहता है रोने में जब दुनिया व्यस्त होती है सोने में.. कभी इस दीवार को तो कभी उस दीवार को निहारता है.. रात में अकेला अपने प्यार को पुकारता है.. कभी चुप हो जाता है कभी रोने लगता है.. कभी अपने प्यार के ख्यालों में खोने लगता है.. खुद को गालियाँ देता है कोसता रहता है.. क्यूँ की इतनी बड़ी गलती सोचता रहता है.. ना ढंग से खा रहा है ना पी रहा है.. अपने प्यार के इंतजार में बस जी रहा है.. मरने की सोचता है पर रुक जाता है.. उसका रोता चेहरा आँखों के सामने आने पर हलक सूख जाता है.. जिसका एक फोटो भी कटने पर देता था रो.. हाल का अन्दाजा लगा लो जब उसको दिया खो.. कोशिश की एक दिन चले जाने की.. नाकाम ह...

नाकाम कोशिश

नाकाम कोशिश.. जान देने की एक और कोशिश नाकाम हो गई.. मैं तड़पता रहा सारी रात मेरी किस्मत सो गई.. दिन में गया था मिलने कि हाल-ए-दिल तमाम बताऊंगा.. कहीं ले जाकर उसको अच्छे से प्यार का अहसास कराऊंगा.. इंतजार किया उसका बाहर आने का.. उसको एक बार फिर से जिन्दगी में लाने का.. खड़ा रहा आधा घंटा धुप में.. शायद कुछ पाप कम हो जाएं पसीने से सूख के.. वो आया बाहर देख के अनदेखा कर गया.. मैं उसी वक्त आधा और मर गया.. चल दिया पीछे पीछे लिम्का हाथ में लिए.. अपने प्यार का पैगाम साथ में लिए.. मैंने पूछा उसे कुछ पीने के लिए.. देने को आखिरी मौका जीने के लिए.. कुछ ना बोला वो बस चलता रहा.. उसका अनदेखापन मुझे रह रह के खलता रहा.. फिर मैंने उसे प्यार का गुस्सा दिखलाया.. वो उसी पुराने वाले अन्दाज में मुस्कुराया.. आंखों में देखा उसकी वही पुराना प्यार था.. फिर भी पता नहीं क्यों उसे इस से इंकार था.. आंखों से पता चला बहुत रोया है.. मैंने एक बेशकीमती हीरा खोया है.. फिर मैंने हाथों में हाथ लेना चाहा.. उसने झटक के अपना हाथ छुड़ाया.. कभी पास होने का अहसास करवाता था जो दूर होके भी.. आज पास होने प...

40 दिन का जहर

   40 दिन का जहर 2 अप्रैल का दिन ऐसा आया था.. जिसने मुझे अन्दर तक हिलाया था.. मन में एक नया उत्साह था.. नई नई नौकरी का चाह था.. घर से निकला था एक नए रंग के साथ.. अपनों से दूर जाने के गम के साथ.. एक अपना ऐसा भी था जो मेरे साथ था.. दूर होने पर भी जिसके हाथों में हाथ होने का अहसास था.. जैसे तैसे कुछ वक्त फिसल गया.. उस एक अपने के सहारे एक सप्ताह निकल गया.. फिर वो दिन आया.. जो मेरी जिंदगी में तुफान लाया.. एक ऐसा तुफान जिसने ना कोई शोर मचाया.. लेकिन मेरी जिंदगी में कोहराम घनघोर मचाया.. उस अपने के हाथों से हाथ छुटता दिखाई दे रहा था.. और वक्त एक नासमझ सी करवट ले रहा था.. गलती मेरी थी मैं कुछ ज्यादा बोल गया.. उसकी हालत देखे बिना नासमझी में मुह खोल गया.. मैं सप्ताह बाद घर पे था.. मगर ध्यान अभी भी उस अपने में था.. बराबर गुरुर दोनों ओर था.. जिसका ना कहीं शोर था.. ना वो बोला ना मैने बोलने की जहमत उठाई.. बस यहीं से मैने अपनी सारी खुशियां गंवाई.. दोनों तरफ दिल में उथल पुथल चल रही थी.. एक दूसरे की कमी दोनों तरफ खल रही थी.. अब मुझपे दोहरी मार थी.. एक तरफ उसकी कमी ...