उतार चढ़ाव
*उतार चढ़ाव*
तुझे शिखर पे चढ़ाकर मैं धरती पर उतर गया..
तुझे खुश करने को मैं सब कुछ कर गया..
तुझे जीना सिखा के खुद मरना सीख गया..
तुझे हंसा के खुद आंसुओं में भीग गया..
तुझे बड़ा करके खुद बच्चा बन गया..
अब तु रखेगा ख्याल मेरा सोच के अक्ल का कच्चा बन गया..
तुझे आगे बढ़ाकर खुद हो गया पीछे..
एक एक पल याद है जो गुजारा तेरी जुल्फों के नीचे..
तुझे समझदार बनाकर खुद पागल बन गया..
तेरी तरक्की से मेरा भी सीना तन गया..
तुझमें हिम्मत भरके खुद कायर बन गया..
तुझसे दूर होने के अहसास से ही डर गया..
तुझे सम्भलना सिखाकर खुद गिर गया..
उल्टे सीधे ख्यालों से मेरा दिमाग फिर गया..
हमेशा तेरा सोच कर अपना सब कुछ भूल गया..
तेरी खातिर हंसते हंसते तुझमें हो मशगूल गया..
लेकिन जब तुने छोड़ा सारे सपने टूट गए..
"मनीष" से अब सारे अपने रूठ गए..
अब "मनीष" इतना टूट गया कि जुड़ ना पाएगा..
वापस चार साल पहले मुड़ ना पाएगा..
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