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Showing posts from 2019

सावन

सावन आया सावन आया ये कैसा सावन आया है.. ना खुशियां हैं ना झूले हैं ना ये बारिश लाया है फिर ये कैसा सावन आया है.. अरे सावन तो तब आता था जब हरियाली लहलहाती थी.. सावन तो तब आता था जब चिड़ियाएं चहचहाती थी.. ना वो मीठी बोली है ना कहीं हरियाली है.. चिड़िया तो मानो खत्म हो गई सूख गई हर पेड़ की डाली है.. अब तो मोटर गाड़ी की टें टें पों पों और प्रदूषण छाया है.. ये कैसा सावन आया है ये कैसा सावन आया है.. मोर नाचते थे बागों में.. रिश्ते बंधते थे कच्चे धागों से.. (रक्षाबंधन) एक कटोरी दूध के बदले वरदान मांगते थे नागों से.. (नाग पंचमी) बाग बगीचे विलुप्त हो गए, मोरों को मारा जाता है.. रिश्ते बंधते चाइनीज़ धागों से और नागों का जहर उतारा जाता है.. लोभ लालच और स्वार्थ का अब तो चारों ओर फैला साया है.. ये कैसा सावन आया है ये कैसा सावन आया है.. आजादी के कहानी किस्से गली गली मशहूर थे.. ले तिरंगा हाथ में हर कोई देशप्रेम में चूर थे.. अब हर घर वीभीषण बैठा लंका खुद की जलवाने को.. गद्दार देश के छुपे देश में फिर से देश को गुलाम कराने को.. ना लोटेगा वो सावन फिर से कह मनीष ने खुद को समझाया है.....

जिंदगी

चलने दो जिंदगी की गाड़ी को वक़्त के पहियों पे... कब वक़्त रुक जाए और ये जिंदगी थम जाए कोई कह नहीं सकता.... 

कोई मिले हमारे जैसा तो बताना जरूर

कोई निभाए हमारी तरह तो जताना जरूर.. कोई मिले हमारे जैसा तो बताना जरूर.. जो करे इंतजार घंटों खड़ा धूप में.. दिलचस्पी हो जिसकी तुझमें ना कि रंग रूप में.. कोई रोए गर तेरे लिए उसे हंसाना जरूर.. कोई निभाए हमारी तरह तो जताना जरूर.. कोई मिले हमारे जैसा तो बताना जरूर.. दूर होकर भी जो पास होने का अहसास कराए.. एक एक फोटो को तेरी सीने से लगाए.. रातभर जागे तेरे लिए उसे प्यार से सुलाना जरूर.. कोई निभाए हमारी तरह तो जताना जरूर.. कोई मिले हमारे जैसा तो बताना जरूर.. तुझसे ज्यादा तेरे बारे में सोचे तेरी फिक्र करे.. अपनी हर बात में भी तेरा जिक्र करे.. गर ना मिले कोई "मनीष" को दोबारा सताना जरूर.. कोई निभाए हमारी तरह तो जताना जरूर.. कोई मिले हमारे जैसा तो बताना जरूर..

तन्हाई में लिखना "मनीष" की मजबूरी है

 ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है.. जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है.. मिलना जुलना हंसना रोना शोर सन्नाटा सब दुनिया के चोंचले हैं.. पंछी भी कहां उड़ पाते हैं जब टूटते उनके अरमानों के घोंसले हैं.. बिना उड़ान के उनकी हर मंजिल अधूरी है..  ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है.. जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है.. कसमें वादे प्यार वफा आज कल कहने की बातें हैं.. झूठी मोहब्बत में आजकल बस बिस्तर तक का साथ निभाते हैं.. बिस्तर पे नजदीकियां मगर दिलों में दूरी है..  ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है.. जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है.. मैं हम तुम ये वो सारे लगे हैं फड़फड़ाने में.. खुद का सलामत रहे आग लगे दूसरे के आशियाने में.. तन्हाई में लिखना "मनीष" की मजबूरी है..  ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है.. जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है..

कुछ बातें अधूरी सी

कुछ बातें अधूरी सी, कुछ यादें अधूरी सी.. बीती हुई कुछ वो रातें जरूरी सी.. पता ना चली और शायद ना चलेगी.. कुछ और शाम ऐसे ही ढलेगी.. होगी मगर एक अनकही मगरूरी सी.. कुछ बातें अधूरी सी, कुछ यादें अधूरी सी.. बीती हुई कुछ वो रातें जरूरी सी.. लौट जाएगा दरिया भी टकराकर साहिल से.. ना कोई आस लगा पाएगा जाहिल से.. होगी मगर एक तल्ख मजबूरी सी.. कुछ बातें अधूरी सी, कुछ यादें अधूरी सी.. बीती हुई कुछ वो रातें जरूरी सी.. आसमान भी खुद पर एतबार करेगा.. एक अरसे बाद कोई उसका दीदार करेगा.. होगी मगर एक अजीब दूरी सी.. कुछ बातें अधूरी सी, कुछ यादें अधूरी सी.. बीती हुई कुछ वो रातें जरूरी सी.. कल गया आज भी गुजर जाएगा.. कल का सूरज एक नया सवेरा लाएगा.. ख्वाबों की दुनिया "मनीष" की होगी पूरी सी.. कुछ बातें अधूरी सी, कुछ यादें अधूरी सी.. बीती हुई कुछ वो रातें जरूरी सी..

अकेले मुस्कुराने की आदत

अकेले मुस्कुराने की आदत डाल ले मनीष कि जमाना जलने लगा है दूसरों को मुस्कुराते देखकर

इश्क़ के गुनाहगार

बेतकल्लुफ हर कोई बीमार बैठा है। हर मोड़ पर इश्क का गुनाहगार बैठा है। 

व्यस्त

वक़्त बेवक़्त बेवजह व्यस्त रहने वालों एक दिन हम भी व्यस्त हो जाएंगे... फिर किसी से कोई शिकवा ना करेंगे और खुद में ही कहीं खो जाएंगे... 

दर्द ए दिल

कोई तो सिला दो मोहब्बत का.. जिसे देखो दर्द ए दिल लिए फिरता है.. 

ख्वाहिश

गर ख्वाहिशों में शिद्दत है तो सोचना क्या.. और दिलों में ख्वाहिश है तो खुद को रोकना क्या

असलियत

अजीब सी कशमकश अजीब सी कहानी है। कुछ कही कुछ अनकही सी हमारी जिंदगानी है। मेरा मेरा की जिसको रट लगाते हैं। बीच रास्ते में वो भी धोखा दे जाते हैं। अपने पराए है, पराए अपने हैं। इन नन्ही नन्ही दो आंखों में बड़े बड़े सपने हैं। ये करेंगे वो करेंगे सबने मचाया शोर है। बाहर से जो दिखते हैं कुछ अंदर से कुछ और हैं। कोई किसी पे कोई किसी पे भरोसा किये बैठा है। जिसपे करो भरोसा वो खुद धोखा खाए बैठा है। रंग रुप पे सब मरते ना गुणों का कोई कद्रदान है। छोड़ खुद के घर को वो बाहर मेहरबान है। कोई तोड़ता तारे ख्वाबों में कोई छुता आसमान है। बड़ी बड़ी अफवाहों में कोई खुद की समझता शान है। बड़े बड़े सपनों में मनीष ने भी एक छोटी सी आस लगाई है। बनी रहे ये शान हमेशा जो मेहनत से कमाई है। 

कोई ना कोई

ना शिकवा ना पहचान ना जान है कोई.. फिर भी बेवजह परेशान है कोई.. ना कलम ना खत ना किताब है कोई.. फिर भी मनीष को पढने को बेताब है कोई.. ना घोड़ा ना गाड़ी ना कार है कोई.. फिर से साथ पैदल चलने को तैयार है कोई.. ना हवा ना पानी ना हसीन शमा है कोई.. फिर भी भक्ति में रमा है कोई.. ना रंग ना रुप ना साज है कोई.. फिर भी छुपा रखा गहरा राज है कोई.. ना चांद ना रोशनी ना चकोर है कोई.. फिर भी बांधे हुए डोर है कोई.. ना परसों ना आज ना कल है कोई.. लग रहा साथ हर पल है कोई.. ना धरती ना सूरज ना गगन है कोई.. किसी और के ख्यालों में मगन है कोई.. ना हम में ना तुम में ना उस में है कोई.. हर तरफ हर जगह हर क्षण में है कोई.. 

दीदार

चुपके से फिर दीदार दे गया कोई.. ए खुदा बख्श दे या फना कर दे मोहब्बत को.. 

Selfish

Only being selfish can help you achieving your target easily. Never trust shits. क्रोध को पालना सीख काशीनाथ..

रूह

जिस्म का रोना रोने वालो रूह का रास्ता लबों से होकर गुजरता है.. 

शर्त ए मोहब्बत

मोहब्बत की शुरुआत ही शर्तों पे होती है जनाब कोई झुकता है तो कोई झुकाता है.. 

आंखों के राज

इन आंखों में भी एक अजीब सा मंजर है.. ना दिखने वाला आंसुओं का समन्दर है.. होठों की हंसी देख कर भी अंदाजा लगा लेते हैं लोग कितने राज दफन इनके अंदर है.. 

पाकिस्तान के नाम एक फौजी के जज्बात

रै 65 अर 71 ने भूलगे के जब थमने मुंह की खाई थी.. हम ने LOC पै थारी भूण्डी बनाई थी.. जब हमने थारे हाड गोड्डे तोड़े थे.. थमने छुटन खातर हाथ पांव जोड़े थे.. रै म्हारा तै फेर भी दिल बडा़ था थम छोड़ दिए.. पर थमने तै इंसानियत के सारे कानून तोड़ दिए.. कदे संसद पे, कदे कठुआ, कदे पठानकोट अर कदे उरी.. थमने बार बार ये नीच हरकत करी.. न्यू कह्या करै कुत्ते की पूंछ कदे सीधी नहीं होया करै.. पर मेरी भारत मां पे जो हाथ गेरै वो सारी जिंदगी रोया करै.. उदाहरण थमने देख लिया होगा Surgical strike में.. थारे सारे आका रोये थे आ आके नै माईक पै.. पर फेर भी थारे अक्ल ना आई.. थमने या नीच हरकत पुलवामा में फेर दोहराई.. आच्छा ना लागता एक बाप नै भी के बार बार बेटे पै हाथ ठावै.. पर एक बाप का फर्ज हो है बिगड़ैल बेटे ने सही लाईन पै ल्यावै.. इस बार इसा लाईन पै ल्यावांगें की थम आगे तै कई बार सोचोगे.. जिनकी हवा पै उछलो हो उन ने अपने हाथां तै ठोकोगे.. थारै पाछली एक एक गलती याद आवैगी.. फेर इसी नीच हरकत करण की सोचण खातर नींद भी नहीं आवैगी.. "मनीष" घणी ना कहता इब तै करके दिखावांगें.. महीने भीतर थ...

तेरी कमी

हां होती है तेरी कमी महसूस हर उस जगह जहाँ मुझे खुद की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। 

बदलाव ए इश्क

बडी़ अजब कहानी है इश्क के बदलाव की जनाब सात जन्मों का प्यार सात दिन पे सिमट गया.. 

YOU IN MY LIFE

Roses are red but not a bed.. To have you in my life, I am glad.. K❤S❤M❤N❤S❤

हौसला

तुफानों से टकराने का हौसला रखता है मनीष चंद तेज हवाओं से डगमगा जाऊं ऐसी फितरत नहीं मेरी

अमानत

छोड़ दे सबूत देना शराफत के.. 'मनीष' अब मायने बदल गए हैं अमानत के.. 

रुबरु : एक स्वप्न

‌"तुम.. नहीं नहीं तुम.. हां तुम" खड़ी भीड़ में उसने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा, "पहचाना मुझे?" मैं आश्चर्यचकित सा उसकी तरफ देखता रहा। उसने ही असमंजस दूर करते हुए चुप्पी तोड़ी, "जनाब मैं वही सुकून हूँ जो तुमको तब मिला था इश्क के रास्ते पर। मैनें रोका था तुमको उस रास्ते जाने से। मगर आप जनाब दूसरी ही धुन में थे। एक ना सुनी मेरी और चलते गये।" मैं अभी भी उसको बस देखे जा रहा था चुपचाप। उसने कहना जारी रखा, "समझाया था मैनें तुमको गर इस रास्ते गए तो मुझे खो दोगे। और देखो आज तुम मुझे ढूंढ रहे हो उस भीड़ में।" तभी मुझे भी अहसास हुआ कि हां इसीलिए तो खड़ा था मैं यहाँ इस भीड़ में सुकून की तलाश में। सच ही तो कह रहा था वो। मैं ही इश्क के रास्ते पर था सब कुछ जान बूझकर भी। जैसे ही मैंने नजर दोबारा उसकी तरफ घुमाई, वो नहीं था वहां। जा चुका था फिर से मुझसे बहुत दूर करवाकर रुबरु मुझे सच्चाई से। मैं वहां खड़ा था अब भी उसी भीड़ में मुझ जैसे लोगों के बीच। तभी मैं खड़ा खड़ा हिलने लगा जोर जोर से। तभी मेरी आंखें खुली तो देखा, मां जगा रही थी मुझे, "बेटा अब उठ भी ले, औ...

Love hurts

Getting in love again and again.. Only gives you tears and pain.. When you first fall in love.. You behave like a dove.. You wanna fly high.. You wanna touch the sky.. You seem only to be with one.. You then see only that person.. It happens for some days.. A lot of promises are made.. You see love everywhere.. For anything you don't care.. But after a time you get bored of it.. You will find it only a shit.. You will feel the pain of breakup.. Nothing will be there for backup.. Then you will be in tears.. You will loss all your cheers.. Then you will remind my lines.. That's all about IM's(INVINCIBLE MANISH) vines.. Getting in love again and again.. Only gives you tears and pain.. 

Truth

Truth hurts once.. Fake sympathy hurts again and again.. 

अंजाम ए इश्क : गजल

कैसे बदनाम कर दूं मोहब्बत को, इल्जाम मुझ पर भी आएगा.. कैसे बेवफा कह दूं उसे, प्यार बदनाम हो जाएगा.. जरूर कोई मजबूरी होगी उसकी बेवफाई की.. गर उसे मैं ना समझूं तो, वादा बेनाम हो जाएगा.. कोशिश की होगी उसने भी जुदा ना होने की, मगर जुदाई ना हो तो, किस्सा ना सरेआम हो पाएगा.. बेमानी होगी उसकी कसमों के साथ, गर कसमें निभा दे तो, खिलाफ परिवार हो जाएगा.. मनीष को छोड़कर दुख तो उसे भी हुआ होगा, मगर कैसे हो सकता है ये कि, सदियों बाद कोई प्यार मुकम्मल हो जाएगा..

जिंदगी मौत की कहानी

एक किस्सा पुराना दोहराता हूँ.. जिंदगी और मौत की नोक झोंक सुनाता हूँ.. दो बहनों की ये कहानी है.. है थोड़ी अलग मगर जानी पहचानी है.. था एक हस्पताल श्मशान के पास.. एक शांत रात थी बहुत उदास.. एक बहन 'जिंदगी' का हस्पताल में ठिकाना था.. तो दूसरी 'मौत' का घर श्मशान विराना था.. उस रात दोनों का बहन प्रेम जाग उठा.. मिलने को एक दूसरी से बावरा मन भाग उठा.. निकल पड़ी दोनों अपने ठिकानो से.. हो बेखबर दुनियादारी के कानों से.. हस्पताल में एक मरीज वेंटिलेटर पर कराह रहा था.. जिंदगी से पीछा छुड़ाने के लिए मौत को बुला रहा था.. दोनों बहनों के मिलने का ये सही ठिकाना था.. दोनों को कुछ समय साथ जो बिताना था.. पहुंची मौत वहां मरीज की करुण पुकार सुनकर.. जिंदगी भी आई वहां थोड़ा सा तनकर.. आते ही दोनों ने मिलने की खुशी जताई.. पर चाहकर भी एक दूसरे को ना गले लगा पाई.. दोनों की आंखों में था एक ही ख्याल.. आंखों आंखों में पूछा एक दूजे का हाल.. तभी जिंदगी ने कहा इतराकर.. थोड़ी आंखे फैलाकर और थोड़ा मुस्कुराकर.. मेरे तो मजे हैं शान से रहती हूँ.. सब मुझे चाहते हैं सबके दिलों में रहती ...

सुकून की नींद

मौत के आगोश में मिली वो सुकुन की नींद  'मनीष'  भटकता रहा सारी दुनिया में ताउम्र जिसके लिए..

बदनाम मोहब्बत

गर खामोशियों के लफ्ज़ पढ लेता हर कोई तो आज मोहब्बत यूं बदनाम ना होती। 

शौक

लिखने का शौक नहीं मुझे.. ये तो जज्बात हैं मेरे दिल के जो कलम को रास्ता बनाए बैठे हैं