तन्हाई में लिखना "मनीष" की मजबूरी है

 ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है..
जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है..

मिलना जुलना हंसना रोना शोर सन्नाटा
सब दुनिया के चोंचले हैं..
पंछी भी कहां उड़ पाते हैं
जब टूटते उनके अरमानों के घोंसले हैं..
बिना उड़ान के उनकी हर मंजिल अधूरी है..
 ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है..
जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है..

कसमें वादे प्यार वफा
आज कल कहने की बातें हैं..
झूठी मोहब्बत में आजकल
बस बिस्तर तक का साथ निभाते हैं..
बिस्तर पे नजदीकियां मगर दिलों में दूरी है..
 ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है..
जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है..

मैं हम तुम ये वो
सारे लगे हैं फड़फड़ाने में..
खुद का सलामत रहे
आग लगे दूसरे के आशियाने में..
तन्हाई में लिखना "मनीष" की मजबूरी है..
 ना बात जरूरी है ना मुलाकात जरूरी है..
जरूरी है तो दिलों में जज्बात जरूरी है..


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