अजीब सी कशमकश अजीब सी कहानी है। कुछ कही कुछ अनकही सी हमारी जिंदगानी है। मेरा मेरा की जिसको रट लगाते हैं। बीच रास्ते में वो भी धोखा दे जाते हैं। अपने पराए है, पराए अपने हैं। इन नन्ही नन्ही दो आंखों में बड़े बड़े सपने हैं। ये करेंगे वो करेंगे सबने मचाया शोर है। बाहर से जो दिखते हैं कुछ अंदर से कुछ और हैं। कोई किसी पे कोई किसी पे भरोसा किये बैठा है। जिसपे करो भरोसा वो खुद धोखा खाए बैठा है। रंग रुप पे सब मरते ना गुणों का कोई कद्रदान है। छोड़ खुद के घर को वो बाहर मेहरबान है। कोई तोड़ता तारे ख्वाबों में कोई छुता आसमान है। बड़ी बड़ी अफवाहों में कोई खुद की समझता शान है। बड़े बड़े सपनों में मनीष ने भी एक छोटी सी आस लगाई है। बनी रहे ये शान हमेशा जो मेहनत से कमाई है।