अभी के हालात

अभी के हालात

ना कुछ चाह रह गया है ना कोई रंग रह गया है..
मनीष अब सिर्फ एक कटी पतंग रह गया है..
जिसका ना कोई पता ना ठिकाना है..
बस कहीं दूर जाके किसी पेड़ में अटक के तबाह हो जाना है..
दुनिया से एकदम अलग थलग हो गया है..
उसका नसीब कहीं जाके सो गया है..
ना किसी से कुछ बात करता है ना बोलता है..
कभी-कभी बस " I MISS YOU " कहने को मुह खोलता है..
पड़ा रहता है सबसे अलग एक कोने में..
लगा रहता है रोने में जब दुनिया व्यस्त होती है सोने में..
कभी इस दीवार को तो कभी उस दीवार को निहारता है..
रात में अकेला अपने प्यार को पुकारता है..
कभी चुप हो जाता है कभी रोने लगता है..
कभी अपने प्यार के ख्यालों में खोने लगता है..
खुद को गालियाँ देता है कोसता रहता है..
क्यूँ की इतनी बड़ी गलती सोचता रहता है..
ना ढंग से खा रहा है ना पी रहा है..
अपने प्यार के इंतजार में बस जी रहा है..
मरने की सोचता है पर रुक जाता है..
उसका रोता चेहरा आँखों के सामने आने पर हलक सूख जाता है..
जिसका एक फोटो भी कटने पर देता था रो..
हाल का अन्दाजा लगा लो जब उसको दिया खो..
कोशिश की एक दिन चले जाने की..
नाकाम हो गई उम्मीद में उसके लौट आने की..
सुन्न पड़ गया है उसके बिना अकेला..
पता नहीं कितना और चलेगा ये सांसों का मेला..
उसका भी 9 तारीख को इम्तहान है..
तब तक मनीष के शरीर में भी जान है..
अगर ना आया वापस तो चला जाएगा..
मनीष अब और दूरी सह नहीं पाएगा..


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