नाकाम कोशिश
नाकाम कोशिश..
जान देने की एक और कोशिश नाकाम हो गई..
मैं तड़पता रहा सारी रात मेरी किस्मत सो गई..
दिन में गया था मिलने कि हाल-ए-दिल तमाम बताऊंगा..
कहीं ले जाकर उसको अच्छे से प्यार का अहसास कराऊंगा..
इंतजार किया उसका बाहर आने का..
उसको एक बार फिर से जिन्दगी में लाने का..
खड़ा रहा आधा घंटा धुप में..
शायद कुछ पाप कम हो जाएं पसीने से सूख के..
वो आया बाहर देख के अनदेखा कर गया..
मैं उसी वक्त आधा और मर गया..
चल दिया पीछे पीछे लिम्का हाथ में लिए..
अपने प्यार का पैगाम साथ में लिए..
मैंने पूछा उसे कुछ पीने के लिए..
देने को आखिरी मौका जीने के लिए..
कुछ ना बोला वो बस चलता रहा..
उसका अनदेखापन मुझे रह रह के खलता रहा..
फिर मैंने उसे प्यार का गुस्सा दिखलाया..
वो उसी पुराने वाले अन्दाज में मुस्कुराया..
आंखों में देखा उसकी वही पुराना प्यार था..
फिर भी पता नहीं क्यों उसे इस से इंकार था..
आंखों से पता चला बहुत रोया है..
मैंने एक बेशकीमती हीरा खोया है..
फिर मैंने हाथों में हाथ लेना चाहा..
उसने झटक के अपना हाथ छुड़ाया..
कभी पास होने का अहसास करवाता था जो दूर होके भी..
आज पास होने पे भी दूर कर रहा था मजबूर होके ही..
चलता रहा तेज तेज कदमों से घर की ओर..
मैं भी पीछे पीछे था बिना किसी शोर..
आंखों से आंख वो मिला ना पाया..
शायद खुद के कमजोर पड़ जाने के डर से घबराया..
आॅटो में सामने मैं भी बैठ गया..
मेरे सामने बैठने की वजह से वो भी ऐंठ गया..
उतर के पैदल चल दिया फिर से घर की ओर..
मैं भी था पीछे पीछे जैसे बंधी हो कोई डोर..
फिर कुछ पुरानी बातों के उल्हाने देने लगा..
मैं सिर पकड़ कर बीच सड़क पर ही रोने लगा..
चिल्ला चिल्लाकर अपने गुनाह कबूल कर रहा था..
माफ कर दो मुझे मैं अब तक भूल कर रहा था..
उसका फिर भी वही दो टूक जवाब था..
मनीष तु मेरे लिए बस एक ख्वाब था..
मैं मिन्नतें करता रहा पर उसे तरस ना आया..
मुझे आत्मदाह की धमकी से डराया..
चलते चलते रेलवे लाइन आ गई..
वो भी मुझसे बिल्कुल तंग पा गई..
बोली मुझसे बुरा ना होगा गर इस से आगे मेरे पीछे आया..
मैंने खुद को रेलवे लाइन के बीच बेबस खड़ा पाया..
जी में आया रेल के आगे कूद जाऊँ..
मर सकता हूं मैं भी उसे ये दिखाऊं..
लेकिन मैं ऐसा कर ना पाया..
रोता रोता वहां से वापस आया..
मन में बस यही था अब मरना है..
उसे अब और तंग नहीं करना है..
इसी सोच से दुकान से नया ब्लेड ले आया..
नस काटने की सोच के घर लाके छुपाया..
घर आते आते तबियत नासाज हो गई थी..
हालत पेट की खराब हो गई थी..
खैर मैं किसी से कुछ नहीं बतलाया..
चुपचाप रात का अपना प्लान बनाया..
मैंने रात को कुछ नहीं खाया..
भूख नहीं है अभी घर पे ये बतलाया..
फिर अलग कमरे में जाकर पहले खुब रोया..
आंसुओं से अपने थोड़े पापों को धोया..
फिर सोचा नस काटने से ना मरा तो..
उसके दिल में फिर से दर्द भरा तो..
यही सोच के घर में पड़ी गोलियां ढुंढ लाया..
अपनी एलर्जी की सारी और PCM की 20 गोलियां ढुंढ लाया..
नस काट ली और 4 PCM ले गया..
दिमाग खराब हो गया तो बची हुई सारी गोलियां एक साथ ले गया..
फिर उसे संदेश भेजने लगा दुनिया से जाते जाते..
तंग कर रहा था उसको भी खुद भी करहाते करहाते..
सिर घुम रहा था आंखों के आगे अन्धेरा छा गया..
खुश था मैं सोच के मनीष तेरा भी अन्त आ गया..
इसके बाद तड़पते तड़पते मैं गहरी नींद के आगोश में था..
कहां पड़ा है तु ना इस होश में था..
सुबह आंख खुली 10:30 के बाद तो थोड़ा होश आया..
खुद को बेबस बेड पे पड़ा पाया..
सिर अब भी घुम रहा था पेट में जलन हो रही थी..
कदम डगमगा रहे थे किस्मत सो रही थी..
जान देने की एक और कोशिश नाकाम हो गई..
तबाह मेरी जिंदगी की खुशियां तमाम हो गई..
लेकिन अब उसे तंग नहीं करूंगा..
जब तक आखिरी सांस नहीं चली जाती एसी कोशिश हर रात करूंगा..
जान देने की एक और कोशिश नाकाम हो गई..
मैं तड़पता रहा सारी रात मेरी किस्मत सो गई..
दिन में गया था मिलने कि हाल-ए-दिल तमाम बताऊंगा..
कहीं ले जाकर उसको अच्छे से प्यार का अहसास कराऊंगा..
इंतजार किया उसका बाहर आने का..
उसको एक बार फिर से जिन्दगी में लाने का..
खड़ा रहा आधा घंटा धुप में..
शायद कुछ पाप कम हो जाएं पसीने से सूख के..
वो आया बाहर देख के अनदेखा कर गया..
मैं उसी वक्त आधा और मर गया..
चल दिया पीछे पीछे लिम्का हाथ में लिए..
अपने प्यार का पैगाम साथ में लिए..
मैंने पूछा उसे कुछ पीने के लिए..
देने को आखिरी मौका जीने के लिए..
कुछ ना बोला वो बस चलता रहा..
उसका अनदेखापन मुझे रह रह के खलता रहा..
फिर मैंने उसे प्यार का गुस्सा दिखलाया..
वो उसी पुराने वाले अन्दाज में मुस्कुराया..
आंखों में देखा उसकी वही पुराना प्यार था..
फिर भी पता नहीं क्यों उसे इस से इंकार था..
आंखों से पता चला बहुत रोया है..
मैंने एक बेशकीमती हीरा खोया है..
फिर मैंने हाथों में हाथ लेना चाहा..
उसने झटक के अपना हाथ छुड़ाया..
कभी पास होने का अहसास करवाता था जो दूर होके भी..
आज पास होने पे भी दूर कर रहा था मजबूर होके ही..
चलता रहा तेज तेज कदमों से घर की ओर..
मैं भी पीछे पीछे था बिना किसी शोर..
आंखों से आंख वो मिला ना पाया..
शायद खुद के कमजोर पड़ जाने के डर से घबराया..
आॅटो में सामने मैं भी बैठ गया..
मेरे सामने बैठने की वजह से वो भी ऐंठ गया..
उतर के पैदल चल दिया फिर से घर की ओर..
मैं भी था पीछे पीछे जैसे बंधी हो कोई डोर..
फिर कुछ पुरानी बातों के उल्हाने देने लगा..
मैं सिर पकड़ कर बीच सड़क पर ही रोने लगा..
चिल्ला चिल्लाकर अपने गुनाह कबूल कर रहा था..
माफ कर दो मुझे मैं अब तक भूल कर रहा था..
उसका फिर भी वही दो टूक जवाब था..
मनीष तु मेरे लिए बस एक ख्वाब था..
मैं मिन्नतें करता रहा पर उसे तरस ना आया..
मुझे आत्मदाह की धमकी से डराया..
चलते चलते रेलवे लाइन आ गई..
वो भी मुझसे बिल्कुल तंग पा गई..
बोली मुझसे बुरा ना होगा गर इस से आगे मेरे पीछे आया..
मैंने खुद को रेलवे लाइन के बीच बेबस खड़ा पाया..
जी में आया रेल के आगे कूद जाऊँ..
मर सकता हूं मैं भी उसे ये दिखाऊं..
लेकिन मैं ऐसा कर ना पाया..
रोता रोता वहां से वापस आया..
मन में बस यही था अब मरना है..
उसे अब और तंग नहीं करना है..
इसी सोच से दुकान से नया ब्लेड ले आया..
नस काटने की सोच के घर लाके छुपाया..
घर आते आते तबियत नासाज हो गई थी..
हालत पेट की खराब हो गई थी..
खैर मैं किसी से कुछ नहीं बतलाया..
चुपचाप रात का अपना प्लान बनाया..
मैंने रात को कुछ नहीं खाया..
भूख नहीं है अभी घर पे ये बतलाया..
फिर अलग कमरे में जाकर पहले खुब रोया..
आंसुओं से अपने थोड़े पापों को धोया..
फिर सोचा नस काटने से ना मरा तो..
उसके दिल में फिर से दर्द भरा तो..
यही सोच के घर में पड़ी गोलियां ढुंढ लाया..
अपनी एलर्जी की सारी और PCM की 20 गोलियां ढुंढ लाया..
नस काट ली और 4 PCM ले गया..
दिमाग खराब हो गया तो बची हुई सारी गोलियां एक साथ ले गया..
फिर उसे संदेश भेजने लगा दुनिया से जाते जाते..
तंग कर रहा था उसको भी खुद भी करहाते करहाते..
सिर घुम रहा था आंखों के आगे अन्धेरा छा गया..
खुश था मैं सोच के मनीष तेरा भी अन्त आ गया..
इसके बाद तड़पते तड़पते मैं गहरी नींद के आगोश में था..
कहां पड़ा है तु ना इस होश में था..
सुबह आंख खुली 10:30 के बाद तो थोड़ा होश आया..
खुद को बेबस बेड पे पड़ा पाया..
सिर अब भी घुम रहा था पेट में जलन हो रही थी..
कदम डगमगा रहे थे किस्मत सो रही थी..
जान देने की एक और कोशिश नाकाम हो गई..
तबाह मेरी जिंदगी की खुशियां तमाम हो गई..
लेकिन अब उसे तंग नहीं करूंगा..
जब तक आखिरी सांस नहीं चली जाती एसी कोशिश हर रात करूंगा..
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