हर कोई मुझे बीच में क्यों छोड़ जाता है सारे रिश्ते नाते एक पल में तोड़ जाता है.. कोई क्यों किसी को बीच में छोड़ जाता है.. मैं भी ऐसे ही कई बार छोड़ा गया हूँ.. अपनों द्वारा कई बार तोड़ा गया हूँ.. शुरूआत पिताजी ने की हमें छोड़ने की.. 20 जुलाई 2008 की वो मनहूस घड़ी थी हमें तोड़ने की.. बीच राह में छोड़ के खुद तो चल गए हमसे बहुत दूर.. खुद हंसते हुए गए हमें कर गए रोने पे मजबूर.. पिताजी के बाद अपनों ने भी छोड़ दिया साथ.. गिरते को बचाने के लिए नहीं दिया किसी ने हाथ.. खैर मां ने हमको गले से लगाया था.. पिताजी के बाद अपना हर सुख हम में ही पाया था.. जितना कर सकती थी उस से ज्यादा किया.. हमें जो चाहिए था तुरन्त ला कर दिया.. दुनिया बातें बनाती रहती थी.. बिन बाप के बेटों और विधवा मां को जली कटी सुनाती रहती थी.. सबकी सुन कर भी अनजान बनी रहती थी.. मेरी मां हमारे लिए ढाल बनी रहती थी.. दुनिया की सुन कर मैं पिसता रहता था.. रातों को एक झरना आंखों से रिसता रहता था.. रिश्तेदार भी छोड़...
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